Hello friends,,,
आज हम क्रिया बारे में पढ़ेंगे ,,
• क्रिया का परिचय •
वे शब्द जिनसे किसी काम के होने या करने का बोध होता है,क्रिया कहलाते है ।
मुख्य रुप से क्रिया दो प्रकार के होते हैं।
• अकर्मक क्रिया •
आज हम क्रिया बारे में पढ़ेंगे ,,
• क्रिया का परिचय •
वे शब्द जिनसे किसी काम के होने या करने का बोध होता है,क्रिया कहलाते है ।
मुख्य रुप से क्रिया दो प्रकार के होते हैं।
• अकर्मक क्रिया •
जब क्रिया का प्रभाव कर्म पर न पड़कर , कर्ता कर करता पर पड़ता है तो उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं ।
जैसे- 1. राम खाता है।
2. सोहन गाता है।
3. मोहन पीता है।
• सकर्मक क्रिया •
जब क्रिया का प्रभाव कर्ता पर न पढ़कर , कर्म पर पढ़ता है तो उसे सकर्मक क्रिया कहता है।
जैसे - 1. राम गाना गाता है।
2. सोहन चम्मच से खाना खाता है।
3. सीता पैरो सो चलता है।
सकर्मक क्रिया के भी दो प्रकार होते है।
1. एक-कर्मक –— जब क्रिया का प्रभाव एक ही कर्म पर पड़ता है तो उसे एक-कर्मक क्रिया कहते है।
जैसे – 1. अशोक हरियाणा जाता है।
2. अरुण पैदल चलता है।
3. अशीश गाना गाता है।
2. द्वि-कर्मक –— जब क्रिया का प्रभाव दो कर्मो पर पड़ता है तो उसे द्वि-कर्मक क्रिया कहते है ।
जैसे – 1. अशोक बस से हरियाणा जाता है।
2. अरुण पैरो से पैदल जाता है।
3. आशीष मुंह से गाना गाता है।
2. अरुण पैदल चलता है।
3. अशीश गाना गाता है।
2. द्वि-कर्मक –— जब क्रिया का प्रभाव दो कर्मो पर पड़ता है तो उसे द्वि-कर्मक क्रिया कहते है ।
जैसे – 1. अशोक बस से हरियाणा जाता है।
2. अरुण पैरो से पैदल जाता है।
3. आशीष मुंह से गाना गाता है।

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